Geethams - Carnatic Music Lessons · Traditional devotional text · Source: vignanam.org (Traditional devotional text (public-domain shlokas))
रागम्: मोहनम् (मेलकर्त 28, हरिकांभोजि जन्यरागम्) स्वर स्थानाः: षड्जम्, चतुश्रुति ऋषभम्, अंतर गांधारम्, पंचमम्, चतुश्रुति धैवतम् आरोहण: स . रि2 . ग3 . . प . द2 . . स' अवरोहण: स' . . द2 . प . . ग3 . रि2 . स तालम्: चतुस्र जाति रूपक तालम् अंगाः: 1 धृतम् (2 काल) + 1 लघु (4 काल) रूपकर्त: अप्पय्य दीक्षितार् भाषा: संस्कृतम् साहित्यम् वर वीणा मृदु पाणि वन रुह लोचन राणी सुरुचिर बंबर वेणी सुरनुत कल्याणी निरुपम शुभगुण लोला निरत जयाप्रद शीला वरदाप्रिय रंगनायकि वांछित फल दायकि सरसीजासन जननी जय जय जय (वर वीणा) स्वराः
Offered for worship and study, not as prediction. Non-commercial.
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