Svarajatis - Carnatic Music Lessons · Traditional devotional text · Source: vignanam.org (Traditional devotional text (public-domain shlokas))
रागम्: बिलहरि (मेलकर्त 29, धीर शंकराभरणं जन्यराग) स्वर स्थानाः: षड्जम्, शुद्ध ऋषभम्, शुद्ध मध्यमम्, पंचमम्, शुद्ध धैवतम् आरोहण: स . रि2 . ग3 . . प . द2 . . स' अवरोहण: स' नि3 . द2 . प . म1 ग3 . रि2 . स तालम्: चतुरस्र जाति त्रिपुट (आदि) तालम् अंगाः: 1 लघु (4 काल) + 1 धृतम् (2 काल) + 1 धृतम् (2 काल) रूपकर्त: पट्नं सुब्रह्मण्य अय्यर् भाषा: तॆलुगु साहित्यम् पल्लवि रार वेणु गोपबाल राजित सद्गुण जयशील अनुपल्लवि सारसाक्ष नेरमेमि मरुबाध कोर्वलेरा चरणं 1 नंदगोपाला ने नॆंदु पोजाला नी विंदु रारा सदमलमदितो मुदमलरग नाकॆदुरुग गदियरा (रार वेणु) चरणं 2 पलुमारुनु गारवमुन निन् पिलचिन पलुकवु नलुगकुरा करिवरद! मरिमरि ना यधरमु ग्रोलरा कनिकरमुग (रार वेणु) चरणं 3 रा नगधर रा मुरहर रा भवहर रावेरा ई मगुवनु ई लललनु ई सॊगसिनि चेकोरा कोरिकलिंपॊंद डॆंदमु नीयंदु चेरॆनु नी चॆन्- त मरुवकुरा करमुलचे मरिमरि निनु शरणनॆदर (रार वेणु) स्वराः पल्लवि
Offered for worship and study, not as prediction. Non-commercial.
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