Sri Krishna · Traditional devotional text · Source: vignanam.org (Traditional devotional text (public-domain shlokas))
ॐ जय भगवद्-गीते मय्या जय भगवद्-गीते । हरि हिय कमल विहारिणि सुंदर सुपुनीते ॥ ॐ जय भगवद्-गीते ॥
कर्म सुकर्म प्रकाशिनि कामासक्तिहरा । तत्त्वज्ञान विकाशिनि विद्या ब्रह्म परा ॥ ॐ जय भगवद्-गीते ॥
निश्चल भक्ति विधायिनि निर्मल मलहारी । शरण रहस्य प्रदायिनि सब विधि सुखकारी ॥ ॐ जय भगवद्-गीते ॥
राग द्वेष विदारिणि कारिणि मोद सदा। भव भय हारिणि तारिणि परमानंदप्रदा ॥ ॐ जय भगवद्-गीते ॥
आसुर-भाव-विनाशिनि नाशिनि तम रजनी । दैवी सद्गुण दायिनि हरि-रसिका सजनी ॥ ॐ जय भगवद्-गीते ॥
समता त्याग सिखावनि हरिमुख की वाणी । सकल शास्त्र की स्वामिनि श्रुतियों की रानी ॥ ॐ जय भगवद्-गीते ॥
दया-सुधा बरसावनि मातु कृपा कीजै । हरिपद प्रेम प्रदायिनि अपनो कर लीजै ॥ ॐ जय भगवद्-गीते ॥
ॐ जय भगवद्गीते मय्या जय भगवद् गीते। हरि हिय कमल-विहारिणि सुंदर सुपुनीते ॥ ॐ जय भगवद्-गीते ॥
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