Geethams - Carnatic Music Lessons · Traditional devotional text · Source: vignanam.org (Traditional devotional text (public-domain shlokas))
रागम्: कल्याणी (मेलकर्त 65, मेचकल्याणी) स्वर स्थानाः: षड्जम्, चतुश्रुति ऋषभम्, अंतर गांधारम्, प्रति मध्यमम्, पंचमम्, चतुश्रुति धैवतम्, काकली निषादम् आरोहण: स . रि2 . ग3 . म2 प . द2 . नि3 स' अवरोहण: स' नि3 . द2 . प म2 . ग3 . रि2 . स तालम्: तिस्र जाति त्रिपुट तालम् अंगाः: 1 लघु (3 काल) + 1 धृतम् (2 काल) + 1 धृतम् (2 काल) रूपकर्त: पुरंधर दास भाषा: संस्कृतम् साहित्यम् कमलजादल विमल सुनयन करिवरद करुणांबुधे हरे करुणाजलधे कमलाकांता केसि नरकासुर विभेदन वरद वेल सुरपुरोत्तम करुणा शारदे कमलाकांता स्वराः
Offered for worship and study, not as prediction. Non-commercial.
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