Sri Venkateswara Swamy · Traditional devotional text · Source: vignanam.org (Traditional devotional text (public-domain shlokas))
रागं: यमुना कल्याणि (65 मेचकल्याणि जन्य) आ: स रि2 ग3 प म2 प द2 स अव: स द2 प म2 प ग3 रि2 स तालं: खंड चापु पल्लवि भावयामि गोपालबालं मन-स्सेवितं तत्पदं चिंतयेहं सदा ॥ चरणं 1 कटि घटित मेखला खचितमणि घंटिका- पटल निनदेन विभ्राजमानं । कुटिल पद घटित संकुल शिंजितेनतं चटुल नटना समुज्ज्वल विलासं ॥ भावयामि गोपालबालं (प) मन-स्सेवितं तत्पदं चिंतयेहं सदा ॥ (प) चरणं 2 निरतकर कलित नवनीतं ब्रह्मादि सुर निकर भावना शोभित पदं । तिरुवेंकटाचल स्थितं अनुपमं हरिं परम पुरुषं गोपालबालं ॥ भावयामि गोपालबालं (प ) मन-स्सेवितं तत्पदं चिंतयेहं सदा ॥ (प )
Offered for worship and study, not as prediction. Non-commercial.
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