Dattatreya · Traditional devotional text · Source: vignanam.org (Traditional devotional text (public-domain shlokas))
इंदुकोटितेज करुणसिंधु भक्तवत्सलं नंदनात्रिसूनु दत्तमिंदिराक्ष श्रीगुरुम् । गंधमाल्य अक्षतादि बृंददेववंदितं वंदयामि नारसिंह सरस्वतीश पाहि माम् ॥ 1 ॥
मोहपाश अंधकार छाय दूर भास्करं आयताक्ष पाहि श्रियावल्लभेश नायकम् । सेव्यभक्तबृंदवरद भूयो भूयो नमाम्यहं वंदयामि नारसिंह सरस्वतीश पाहि माम् ॥ 2 ॥
चित्तजादिवर्गषट्कमत्तवारणांकुशं तत्त्वसारशोभितात्म दत्त श्रियावल्लभम् । उत्तमावतार भूतकर्तृ भक्तवत्सलं वंदयामि नारसिंह सरस्वतीश पाहि माम् ॥ 3 ॥
व्योम वायु तेज आप भूमि कर्तृमीश्वरं कामक्रोधमोहरहित सोमसूर्यलोचनम् । कामितार्थदातृ भक्तकामधेनु श्रीगुरुं वंदयामि नारसिंह सरस्वतीश पाहि माम् ॥ 4 ॥
पुंडरीक आयताक्ष कुंडलेंदुतेजसं चंडदुरितखंडनार्थ दंडधारि श्रीगुरुम् । मंडलीकमौलि मार्तांड भासिताननं वंदयामि नारसिंह सरस्वतीश पाहि माम् ॥ 5 ॥
वेदशास्त्रस्तुत्यपाद आदिमूर्ति श्रीगुरुं नादबिंदुकलातीत कल्पपादसेव्ययम् । सेव्यभक्तबृंदवरद भूयो भूयो नमाम्यहं वंदयामि नारसिंह सरस्वतीश पाहि माम् ॥ 6 ॥
अष्टयोगतत्त्वनिष्ठ तुष्टज्ञानवारिधिं कृष्णवेणितीरवास पंचनदीसंगमम् । कष्टदैन्यदूरि भक्ततुष्टकाम्यदायकं वंदयामि नारसिंह सरस्वतीश पाहि माम् ॥ 7 ॥
नारसिंहसरस्वती नाम अष्टमौक्तिकं हार कृत्य शारदेन गंगाधर आत्मजम् । धारणीक देवदीक्ष गुरुमूर्ति तोषितं परमात्मानंद श्रिया पुत्रपौत्रदायकम् ॥ 8 ॥ [पाठभेदः – प्रार्थयामि दत्तदेव सद्गुरुं सदाविभुम्]
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नारसिंहसरस्वतीय अष्टकं च यः पठेत् घोर संसार सिंधु तारणाख्य साधनम् । सारज्ञान दीर्घ आयुरारोग्यादि संपदां चारुवर्गकाम्यलाभ नित्यमेव यः पठेत् ॥ 9 ॥ [वारं वारं यज्जपेत्]
इति श्रीगुरुचरितामृते श्रीनृसिंहसरस्वत्युपाख्याने सिद्धनामधारक संवादे श्रीनृसिंहसरस्वती अष्टकम् ॥
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