Guru · Traditional devotional text · Source: vignanam.org (Traditional devotional text (public-domain shlokas))
शिरिडीवासा सायिप्रभो जगतिकि मूलं नीवे प्रभो दत्त दिगंबर अवतारं नीलो सृष्टि व्यवहारम् ॥
त्रिमूर्तिरूपा ओ सायी करुणिंचि कापाडोयि दर्शनमिय्य गरावय्य मुक्तिकि मार्गं चूपुमया ॥ 1 ॥ शिरिडीवासा सायिप्रभो ॥
कफिनि वस्त्रमु धरियिंचि भुजमुकु जोली तगिलिंचि निंब वृक्षपु छायलो फकीरु वेषपु धारणलो कलियुगमंदुन वॆलसितिवि त्यागं सहनं नेर्पितिवि शिरिडी ग्रामं नी वासं भक्तुल मदिलो नी रूपम् ॥ 2 ॥ शिरिडीवासा सायिप्रभो ॥
चांद् पाटिल् नु कलुसुकुनि आतनि बाधलु तॆलुसुकुनि गुर्रमु जाड तॆलिपितिवि पाटिल् बाधनु तीर्चितिवि वॆलिगिंचावु ज्योतुलनु नीवुपयोगिंचि जलमुलनु अच्चॆरुवॊंदॆनु आ ग्रामं चूसि विंतैन आ दृश्यम् ॥ 3 ॥ शिरिडीवासा सायिप्रभो ॥
बायिजा चेसॆनु नी सेव प्रतिफलमिच्चावो देवा नी आयुवुनु बदुलिच्चि तात्यानु नीवु ब्रतिकिंचि पशुपक्षुलनु प्रेमिंचि प्रेमतो वाटिनि लालिंचि जीवुलपैन ममकारं चित्रमया नी व्यवहारम् ॥ 4 ॥ शिरिडीवासा सायिप्रभो ॥
नी द्वारमुलो निलिचितिनि निन्ने नित्यमु कॊलिचितिनि अभयमुनिच्चि ब्रोवुमया ओ शिरिडीशा दयामया धन्यमु द्वारक ओ मायी नीलो निलिचॆनु श्रीसायि नी धुनि मंटल वेडिमिकि पापमु पोवुनु ताकिडिकि ॥ 5 ॥ शिरिडीवासा सायिप्रभो ॥
प्रलय कालमु आपितिवि भक्तुलनु नीवु ब्रोचितिवि चेसि महम्मारी नाशं कापाडि शिरिडी ग्रामं अग्निहोत्रि शास्त्रिकि लीला महात्म्यं चूपिंचि श्यामानु ब्रतिकिंचितिवि पामु विषमु तॊलिगिंचि ॥ 6 ॥ शिरिडीवासा सायिप्रभो ॥
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भक्त भीमाजीकि क्षयरोगं नशियिंचे आतनि सहनं ऊदी वैद्यं चेसावु व्याधिनि मायं चेसावु काकाजीकि ओ सायि विठल दर्शन मिच्चितिवि दामूकिच्चि संतानं कलिगिंचितिवि संतोषम् ॥ 7 ॥ शिरिडीवासा सायिप्रभो ॥
करुणासिंधू करुणिंचु मापै करुण कुरिपिंचु सर्वं नीके अर्पितमु पॆंचुमु भक्ति भावमुनु मुस्लिं अनुकॊनि निनु मेघू तॆलुसुकुनि आतनि बाध दाल्चि शिवशंकर रूपं इच्चावय्या दर्शनमु ॥ 8 ॥ शिरिडीवासा सायिप्रभो ॥
डाक्टरुकु नीवु रामुनिगा बल्वंतकु श्रीदत्तुनिगा निमोनुकरकु मारुतिगा चिदंबरकु श्रीगणपतिगा मार्तांडकु खंडोबागा गणूकु सत्यदेवुनिगा नरसिंहस्वामिगा जोषिकि दर्शनमु निच्चिन श्रीसायि ॥ 9 ॥ शिरिडीवासा सायिप्रभो ॥
रेयि पगलु नी ध्यानं नित्यं नी लीला पठनं भक्तितो चेयंडि ध्यानं लभिंचुनु मुक्तिकि मार्गं पदकॊंडु नी वचनालु बाबा माकवि वेदालु शरणनि वच्चिन भक्तुलनु करुणिंचि नीवु ब्रोचितिवि ॥ 10 ॥ शिरिडीवासा सायिप्रभो ॥
अंदरिलोन नी रूपं नी महिम अति शक्तिमयं ओ सायि मेमु मूढुलमु ऒसगुमया माकु ज्ञानमुनु सृष्टिकि नीवेनय मूलं सायि मेमु सेवकुलं सायि नाममु तलचॆदमु नित्यमु सायिनि कॊलिचॆदमु ॥ 11 ॥ शिरिडीवासा सायिप्रभो ॥
भक्ति भावन तॆलुसुकॊनि सायिनि मदिलो निलुपुकॊनि चित्तमुतो सायी ध्यानं चेयंडि प्रतिनित्यं बाबा काल्चिन धुनि ऊदि निवारिंचुनु अदि व्याधि समाधि नुंडि श्रीसायि भक्तुलनु कापाडेनोयि ॥ 12 ॥ शिरिडीवासा सायिप्रभो ॥
मन प्रश्नलकु जवाबुलु तॆलुपुनु सायि चरितमुलु विनंडि लेक चदवंडि सायि सत्यमु चूडंडि सत्संगमुनु चेयंडि सायि स्वप्नमु पॊंदंडि भेद भावमुनु मानंडि सायि मन सद्गुरुवंडि ॥ 13 ॥ शिरिडीवासा सायिप्रभो ॥
वंदनमय्या परमेशा आपद्बांधव सायीशा मा पापमुलू कडतेर्चु मा मदि कोरिक नॆरवेर्चु करुणामूर्ति ओ सायि करुणतो ममु दरिचेर्चोयी मा मनसे नी मंदिरमु मा पलुकुले नीकु नैवेद्यम् ॥ 14 ॥ शिरिडीवासा सायिप्रभो ॥
अखिलांडकोटि ब्रह्मांडनायक राजाधिराज योगिराज परब्रह्म श्रीसच्चिदानंद सद्गुरु सायिनाथ् महराज् की जै ॥
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